युगांडा में राष्ट्रपति चुनाव के दौरान इंटरनेट बंदी, मतदान में देरी और भारी सुरक्षा तैनाती ने लोकतंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं. 1986 से सत्ता में बैठे राष्ट्रपति योवेरी मुसेवेनी एक बार फिर मैदान में हैं, जबकि विपक्ष गड़बड़ियों और दमन का आरोप लगा रहा है. मानवाधिकार संगठनों ने चुनावी माहौल को डर और दबाव भरा बताया है.
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